हम किसी से कम नहीं

   हम हमेशा दूसरों को देखकर व्यर्थ ही स्वयं की तुलना उनसे करने लगते है और दु:खी हो जाते है,भगवान ने सबको अलग बनाया है और अलग गुण दिए हैं,हम उसका महत्व नहीं समझते और दु:ख के चक्र में फंस जाते हैं, इसलिए दूसरों के पास जो है, उसे देखकर जलने की बजाय हमें हमारे पास जो है, उसके साथ खुश रहना सीखना चाहिए।
      एक मजदूर रोज पत्थर तोड़ने का काम करता था । दिन भर कडी़ मेहनत करता । और परिवार के लिए रोजी रोटी का जुगाड़ करता । यही उसकी दिनचर्या थी । वह अपने काम से संतुष्ट नहीं था , दिन भर हाड़तोड़ मेहनत करता हुं , मुश्किल से रोजी रोटी का जुगाड़ हो रहा है । वह अक्सर सोचता रहता काश मै भी मालिक जैसा बडा़ आदमी होता । दो चार नौकर होते , आराम से जिंदगी गुजारता , एक दिन  वह सोचते सोचते पेड़ के घने छांव मे सो जाता  है ।  सपने मे वो देखता है कि वो सचमुच बडा़ आदमी बन गया है , पत्थर की खदान है , चालीस पचास मजदूर काम कर रहे है । वो खादान देखने जा रहा है , मगर ये क्या ??
धुप के कारण वह चक्कर खाकर बेहोश हो जाता है ।
फिर होश आते ही सोंचता है , मुझको सुर्य ही बनना था , वही सबसे बडा़ है , और वह सुर्य बन जाता है , फिर इठलाता हुआ सभी पर अपनी रोशनी फेकना लगता है । मगर थोडी़ देर मे बादल का टुकडा़ आता है , और सूरज की रोशनी को रोक देता है , अब मजदूर सोचता है, ये बादल तो सुर्य से भी ताकतवर है  । मुझे बादल ही बनना है, और वो बादल बन बन जाता है , इधर उधर इठलाते हुए घुमने लगता है , इतने मे हवा का एक ते झोंका आता है , और उसको दूसरी ओर फेंक देता है ।  मजदूर सोचता है, इससे अच्छा तो मुझको हवा ही बनना था , जो सब का रूख बदल देता है ,।और वो हवा  बन जाता है । फिर मस्ती मे लहराने लगता लगता है । जैसे ही वह पहाड़ के पास  जाता है । पहाड़ उसे रोक लेता है । मजदूर सोंचता है , पहाड़ ही सबसे बडा़ है , क्यूं न पहाड़ बन जांऊ और वो पहाड़ बन इठलाने लगता है , कुछ समय मे उसे कुछ आवाज सुनाई पड़ता है ,
 कोई हथोडी़ छैनी से पहाड़ को तोड़ रहा है ,  फिर सोचने लगता है , अरे पहाड़ के पत्थर तोड़ने वाला ही बडा़ है , 
अब सोचता है , पत्थर तोड़ने वाला ही बन जाऊं मगर इस बार वह पत्थर तोड़ने वाला नहीं बन पाता । हड़बडा कर उसकी आंखे खुल जाती है , फिर वह आईने के पास जाता है , तब वह देखता है , वो पत्थर तोड़ने वाला तो वो खुद है ।
इसका मतलब हुआ , हम भी किसी से कम नहीं ।
*आपका जीवन आपके विचारों का प्रतिबिंब है,*
*यदि आप अपनी सोच को बदलते हैं तो आप*
*अपना जीवन बदल देंगे।*