शब्द की शक्ति

*कभी कभी हम गलत नहीं होते,* 
*बस वो शब्द नहीं मिल पाते*......
*जो हमे सही साबित कर सके।*
   एक हास्पीटल के सेमीप्राइवेट वार्ड मे दो मरीज रहते थे।
एक कैंसर से पिडित था , दूसरा पैरालिसिस (लकवा) से पिडित था । कैंसर पिडित ब्यक्ति थोडा़ चल फिर सकता था।
लकवा पिडित ब्यक्ति खाट मे ही पडा़ रहता था । कुछ ही दिन मे दोनो बहुत अच्छे दोस्त  बन गये ।  कैंसर पिडित ब्यक्ति , लकवा पिडित के पास आता और खिड़की बाहर देखते हुए , उसे कमरे के बाहर का आंखो देखे नाजारा  सुनाता ।  मित्र खिड़की के बाहर  बहुत बडा़ बगीचा है , वहां बहुत सारे रंग बिरंगे फुल खिले खिले है । बगीचे के एक किनारे  मे मैदान भी  है , वहां कुछ बच्चे क्रिकेट खेल रहें है । ऐसे ही रोज वह अपने लकवा से पीडित मित्र को  खिड़की के बाहर का मनोरम दृष्य बताता । एक दिन कैंसर पिडित ब्यक्ति को  बहुत दर्द हुआ , और इलाज के लिए उसे गहनचिकित्सा केंद्र मे ले गये , फिर वह वापस नहीं आया । दुसरे दिन लकवा पिडित ब्यक्ति ने नर्स से पुछा सिस्टर मेरे मित्र अभी तक नहीं आए उनका क्या हाल है ? तब नर्स ने उन्हे बताया कि उसका स्वर्गवास हो गया । लकवा पिडित ब्यक्ति  असीम पीडा़ से भर गया । उसे अब जीने की इछा नहीं रही , फिर एक बार सोचा अब तो मरना ही है । मगर एक बार मेरे  मित्र खिडकी के बाहर जिस बगीचे का वर्णन करता था , देख लेता हुं ।
उसने मन मे ठाना और पुरे शक्ति लगाकर पलंग से उठ गया , अब उसमे हिम्मत आ गई , अब धीरे धीरे चलते हुए वह  खिडकी के पास पहुंच गया , जैसे ही खिड़की के बाहर देखा उसे टीन के छप्पर वाले गोदाम दिखाई दिये , उसके उस पार गंदे पानी का नाला था ,और  जंगली  झांडी़ थे । उसको बहुत निराशा हुई मन ही मन सोचने लगा उसके मित्र ने उससे झूंठ क्यों बोलता ।
    उन्होने सिस्टर से पुछा कि सिस्टर क्या यहा कोई बहुत बडा़ बगीचा है क्या ??? सिस्टर ने कहा नहीं तो जो आप टिने का छप्पर वाले गोदाम देख रहे है , उसके उस पार गंदे पानी निकासी के लिए नाले और जंगली झांड़ है ।
    लकवा पिडित ब्यक्ति ने सिस्टर को सारी बातें बताई कि मेरा मित्र  खिड़की के बाहर बहुत बडे़ बगीचे है , बोलता था और वहां के मनोरम दृष्य का वर्णन करता था । मगर ऐसा कुछ नहीं है । आखिर मेरा मित्र झूठ क्यो बोलता था ???
सिस्टर ने कहा कि वो झूठ क्यों बोलता था , ये तो नहीं मालुम  मगर उसके कहे शब्दों के कारण आप चलकर खिड़की के पास पहुंच गये । यही उसके शब्द की शक्ति है ।
*मनुष्यों के पास धन-दौलत के अंबार हो सकते है लेकिन बुद्धिमान मनुष्य की वाणी तो अनमोल होती हैं.*