*दो अनमोल रत्न*


*खुद्दारी गिरवी रखता हूँ*,
*जमीर दूसरों को थमा देता हूँ*,
*और ये दुनिया कहती है,*
*मैं पैसा अच्छा कमा लेता हूँ.*
      कहावत है कि ईमानदारी (Honesty) से बड़ी कोई पूंजी नही हैं, यह देवगुण है, तथा जिस व्यक्ति के चरित्र में ईमान का गुण होता है, वह न केवल सुख के साथ जीवन बिताता है, बल्कि लोग भी उसका सम्मान और अनुसरण करते हैं. आज की दुनियां में ईमानदारी की राह पर चलकर सारे साधन पाए जा सकते है, मगर इन साधनों से ईमानदारी को पाना असम्भव हैं. भीड़ में विशेष बनिये अपनी ईमानदारी को अपनी पहचान बनाइए. 
    एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक अच्छी नस्ल का ऊँट दिखाई पड़ा।
सौदागर और  ऊँट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और  *आखिर में सौदागर ऊँट खरीद कर घर ले आया।*
घर पहुँचने पर  सौदागर ने अपने नौकर को ऊँट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया..।
कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली। *जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला..।*
नौकर चिल्लाया, *"मालिक आपने ऊँट खरीदा, लेकिन देखो, इसके साथ क्या  मुफ्त में आया है।"*
सौदागर भी हैरान था, उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे।
सौदागर बोला: *" मैंने ऊँट ख़रीदा है, न कि हीरे, मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए।"*
नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना बेवकूफ है...।
बोला :- *"मालिक किसी को पता नहीं चलेगा।" परन्तु सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुँचा, और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी।* 
ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था, बोला, *"मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने  कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे।*
अब आप इनाम के तौर पर कोई भी एक हीरा चुन लीजिए।
*"सौदागर बोला," मैंने ऊँट के लिए सही कीमत चुकाई है, इसलिए मुझे किसी शुक्राने और ईनाम की जरूरत नहीं है।"* 
जितना सौदागर मना करता जा रहा था, ऊँट बेचने वाला उतना ही ज़ोर दे रहा था।
आख़िर में सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा :- असलियत में जब मैंने थैली वापस लाने का फैसला किया तो  *मैंने पहले से ही दो सबसे कीमती हीरे इसमें से अपने पास रख लिए थे।*
इस कबूलनामे के बाद ऊँट बेचने वाला भड़क गया, उसने अपने हीरे जवाहरात गिनने के लिए थैली को फ़ौरन खाली कर लिया।
*पर वह था बड़ी पशोपेश में बोला,"मेरे सारे हीरे तो यही हैं, तो सबसे कीमती दो कौन से थे जो आपने रख़ लिए?"*
सौदागर बोला:... *" मेरी ईमानदारी और मेरी खुद्दारी।"*
हमें अपने अंदर झांकना होगा कि हम में से किस किस के पास ये 2 अनमोल रतन हैं,  वह दुनिया सबसे अमीर व्यक्ति है।*
     खुद्दारी का मतलब आत्मसम्मान होता है. हर इंसान की अपनी नजर में इज्जत होती है और वही इज्जत वह दूसरों की नजरों में देखना चाहता है.
    जो लोग ईमानदारी से अपना जीवन जीते है वो खुद्दार ही होते है. लालच और स्वार्थ में आकर अपने आत्मसम्मान का सौदा नहीं करते है. परन्तु अब जमाना बदल रहा है लोग पैसे के लिए खुद्दारी और आत्मसम्मान को भी दांव पर लगाने में नहीं हिचकिचाते है.
*आ कही मिलते हैं हम, ताकि बहारे आ जाएँ*,
*इस से पहले कि तअल्लुक में दरारें आ जाएँ*,
*ये जो खुद्दारी का मैला सा अंगोछा है मेरा*,
*मैं अगर बेच दूँ इसको तो कई कारें आ जाएँ*.


Tags - 

#story #storytelling #storyofmylife #storyteller #storytime #storyofthestreet #storyboard  #Storybook #Storytellers  #storyportrait  #storyboarding  #storypromoter  #storyboards #storyline  #storyoftheday #storys #storybridge    #Storyclub #storyart #storyofindia #moralstories #interestingstories #eductionalstories #hindistories #ज्ञानवर्धककहानियां 
#नैतिककहानियाँ #शिक्षाप्रदकहानियां  #प्रेरककथा # बोधात्मककहानियां 
#हिंदीकहानियां #मनोरंजककहानियां #लोककहानियां #folkstories #dharmik kahaniyan #kidsstories 
Someone else is the real author of this story.
Our Other Popular Stories -