. ईश्वर सबकी सुनता हैं
शहर के बीचो बीच एक बड़ी सोसाइटी की बिल्डिंग थी ।
उसमें सबसे ऊपर वाले मकान में एक लड़का दीपक रहता था । वो रोजाना खाना खाकर रात को 9 से 10 बजे तक ऊपर छत पर घूमता था। उस बिल्डिंग के पास कुछ जुग्गी झोपड़ीयां बनी हुई थी ।
पिछले एक-डेढ़ महीने से वो रोज एक बच्चे को देख रहा था, जो रोजाना एक गुब्बारे को ऊपर छोड़ता था और उसे तब तक देखता रहता जब तक वह आँखों से ओझल न हो जाए ।
एक दिन दीपक दोस्त से बात करने के कारण थोड़ा लेट छत पर घूमने गया तो उसे वो बच्चा दिखाई नहीं दिया । दीपक ने ऊपर देखा, कही कोई गुब्बारा उड़ता हुआ दिख जाये तो उसे एक गुब्बारा अपनी पानी की टंकी में अटका हुआ दिखा । दीपक समझ गया कि यह गुब्बारा उस बच्चे का है और उसने सोचा की उस गुब्बारे को निकालकर बच्चे को दे आऊंगा और वह टंकी पर चढ़ गया ।
उसने देखा कि उस गुब्बारे पर कुछ लिखा हुआ था। दीपक उसे पढ़कर बैचेन हो गया ।
उस पर लिखा था कि .......
हे ऊपर वाले मेरी माँ की तबियत बहुत खराब है और उसके इलाज के लिए किसी को भेज दें मेरे पास इतने सारे पैसे नहीं है ।
यह पढ़कर दीपक रात भर सो नहीं पाया । वह सबेरे उठते ही उस लड़के से मिलने चला गया । उसने जाकर देखा तो सच में उसकी मां की तबियत खराब थी ।
दीपक ने उस लड़के से पुछा की तुम रोज गुब्बारे पर लिखकर क्यों गुब्बारा उड़ाते हो, ये तुम्हें किसने बताया कि ऐसा करने से ईश्वर तुम्हारी मदद करेगा ।
उस लड़के ने कहा- ये सब मुझे भिखारी दादा ने कहा था ।
एक दिन मैं रात को होटल से घर आ रहा था तो उन्होंने कहा कि मेरी तबियत खराब है और मैं आज भीख मांगने नहीं जा सका, मैं दो दिन से भूखा हूँ ।
क्या तुम मुझे खाना खिलाओगे ?
तो मैंने उन्हें खाना लाकर दे दिया, तो उन्होंने कहा कि- बेटा तेरी मदद ऊपरवाला करेगा । मैने पूछा -वो सच में मेरी मदद करेगा क्या ?
दादा ने कहा- जैसे मेरे लिए उसने तुझे भेजा है, वैसे ही वो तेरे लिए भी किसी को भेज देगा ।
दीपक ने पूछा- तो गुब्बारे पर लिखने का किसने बोला और तुम रात को ही क्यों छोड़ते हो दिन में क्यों नहीं ।
वो लड़का बोला- दादा ने कहा था कि तेरी ऊपरवाला मदद करेगा । मैं रोज सोचता था कि ऊपर वाले तक बात कैसे पहुंचाऊं । एक दिन मैने एक गुब्बारे को बहुत ऊंचाई पर जाते हुए देखा तो मुझे यही रास्ता समझ में आया। मैं होटल में काम करता हूँ । मुझे रोज रात को ही पैसे मिलते हैं इसलिए मैं रोज रात को गुब्बारा छोड़ता हूँ ।
उस बच्चे की बातें सुनकर दीपक की आँखों में आँसू आ गये और उसने उस बच्चे को गले लगाते हुए कहा कि बेटा वो दादा सही कह रहे थे उस ऊपर वाले ने ही तेरी मदद के लिए मुझे भेजा है ।
और दीपक ने उसकी मां का इलाज कराया। बच्चे का माँ के प्रति प्यार देखकर.. उसकी और भी बहुत सारी मदद की उसे स्कूल में भर्ती कराया ।।
दोस्तों इस कहानी से हमें कुछ बातें समझ में आयी कि ईश्वर उस बच्चे पर खुश क्यों हुआ । उसका माँ के लिए प्यार, गरीब होते हुए भी उसके मन में दूसरों के लिए दया, उसका भोलापन और सबसे बड़ी बात उसका विश्वास जो उसने एक-डेढ़ महीने तक गुब्बारे में लिखकर ईश्वर को भेजा ।
यदि ये बातें हम लोगों मे भी पैदा हो जाएं तो इसमें कोई शक नहीं कि वो प्यारा ईश्वर हमारी तकलीफों में भी किसी ना किसी को भेज ही देगा ।
तो दोस्तों विश्वास करो वो ईश्वर हमें हर पल देख रहा हैं ।
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