.           कैमरे की नज़र 

अशोक के घर के पास एक डेयरी वाला है| वह डेयरी वाला ऐसा है कि आधा किलो "घी" में, अगर 'घी' 502 ग्राम तुल गया तो 2 ग्राम 'घी, वापिस निकाल लेता था।

एक बार अशोक आधा किलो 'घी' लेने गया. उसने अशोक को 90 रूपये ज्यादा दे दिये। उस ने कुछ  देर  सोचा और  पैसे लेकर निकल लिया। उस ने मन में सोचा,कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था, 'बच्चू,अब एक ही दिन में निकल गया।

अशोक ने घर आकर "अपनी गृहलक्ष्मी जी" को कुछ नहीं बताया और घी दे दिया। उसने जैसे ही 'घी, डिब्बे में पलटा, आधा घी बिखर गया, उसे झट से कहावत  याद आ गयी “बेटा चोरी का  माल मोरी में” और आप यकीन मानिए वो 'घी,  किचन की सिंक में ही गिरा था।

 इस वाकये को कई महीने बीत गये थे। परसों  शाम को अशोक  वेज रोल  लेने गया, उस दुकानदार ने भी  अशोक को सत्तर रूपय  ज्यादा दे दिये, उसने फिर मन ही मन सोचा  चलो बेटा!! आज फिर चैक करते हैं कि क्या वाकई में भगवान 'हमें, देखता है। उसने  रोल पैक कराये और पैसे लेकर निकल लिया। आश्चर्य तब हुआ जब एक रोल  अचानक रास्ते में  ही गिर गया, घर पहुँचा, बचा हुआ रोल टेबल पर रखा, उसने अपना मनपसंद काँच का गिलास उठाया जूस निकालने के लिये  ,अरे•••यह क्या?•••गिलास हाथ से फिसल कर टूट गया। उस ने हिसाब लगाया करीब-करीब सत्तर में से साठ रूपय का नुकसान हो चुका था, वह,बडा आश्चर्यचकित था।     उसने मन ही मन में कहा ••ये भगवान तो•••मेरे पीछे ही पड गया, 
जब कल शाम को 'सुभिक्षा वाले, ने उसे  तीस रूपये ज्याद दे दिये। उसने  अपनी धर्म-पत्नी से पूछा क्या कहती हो!!! एक ट्राई और मारें।? उन्होने मुस्कुराते हुये कहा–जी नहीं, और हमने पैसे वापस कर दिये। बाहर आकर उसकी धर्म-पत्नी जी ने कहा– 
वैसे एक ट्राई और मारनी चाहिये थी।
कहना था•••कि•• उन्हें एक ठोकर लगी•••और वह गिरते-गिरते बचीं!!?
अशोक सोच में पड गया कि क्या वाकई भगवान हमें देख रहा है। हाँ, भगवान हमें हर पल हर क्षण देख रहा है। हम  बहुत  सी  जगह  पोस्टर लगे देखते हैं, 
"आप  कैमरे की नजर में" हैं।
... पर याद  रखना हम हर  क्षण पल प्रतिपल उसकी नजर में हैं।

वो हर पल गलत कार्य करने से पहले और बाद में भी हमें आगाह करता है। लेकिन यह समझना न समझना हमारे विवेक पर निर्भर करता है।

सदैव जाग्रत रहें और जाग्रत करें 🙏🏻