नशा
सुबह-सुबह जंगल में सैर के लिए एक खरगोश जा रहा था । उसने देखा कि एक भालू बैठकर शराब पी रहा है ।
खरगोश से रहा न गया औऱ उसने भालू से कहा..... चाचा, क्यों ख़ुद भी मर रहे हो औऱ अपने बाल बच्चों को भी मारने पर तुले हो.... शराब बहुत बुरी चीज़ है इसे त्याग दो ।
भालू उसकी बातों से बहुत प्रभावित हुआ औऱ रोने लगा । उसने कहा... तू बिलकुल ठीक कह रहा है भतीजे.. आज से शराब बंद । उसके बाद भालू भी खरगोश के साथ चल पड़ा । कुछ दूर आगे जाने के बाद दोनों ने देखा कि एक लोमड़ी सिगरेट पी रही है ।
उसे देख खरगोश ने कहा... अपना फेफड़ा ख़राब मत करो मौसी.... ये सिगरेट बहुत बुरी चीज़ है, अभी से तौबा कर लो नहीं तो जीवन नर्क हो जाएगा तुम्हारा । लोमड़ी ने खरगोश की बातों को बहुत गंभीरता से लिया औऱ उसने उसी समय सिगरेट छोड़ने का फैसला कर लिया ।
अब खरगोश औऱ भालू के साथ लोमड़ी भी चल पई।तीनों कुछ दूर आगे गए ही थे कि एक बाघ ताड़ी पी रहा था । बाघ को नशा करते देख खरगोश से चुप्पी न साधी गई औऱ उसने अपनी ज़ुबान चलाई.... दादा, अगर मरना चाहते हो तो आसान तरीका ढूंढ़ो... नशे की बुरी लत से मरकर क्यों अपने बीबी बच्चों को अनाथ करना चाह रहे हो ??
उसकी बातों को सुनकर बाघ ने भी नशे से तुरंत तौबा कर ली औऱ वो भी उनके साथ हो लिया । चारो साथ कुछ दूर बढे ही थे कि उन्होंने देखा कि एक जिराफ़ भांग पिस रहा है । उन चारों को देख जिराफ़ बोला... आओ आओ, तुम सब को भांग की शरबत पिलाता हूँ.... इसे पीकर तुमलोग झूमने लगोगे । खरगोश फिर व्याकुल हो गया औऱ उससे फिर जब रहा न गया तो उसने कहा... ताऊ, तुम्हें अपने शरीर से बैर है क्या ? नहीं न ?? फ़िर क्यों भांग की नशा कर रहे हो । नशा करने से आयु कम होती है औऱ आदमी जल्दी टें बोल देता है ।
जिराफ़ खरगोश की बातों को सुनकर कुछ पल के लिए खामोश हो गया, उसके बाद बोला... बेटे, उम्र में तू भले ही छोटा है लेकिन बात तो बिलकुल पते की बोल रहा है...चल आज से नशा बंद । उसके बाद जिराफ़ भी उन सब के साथ हो लिया औऱ सब जंगल में आगे बढ़े ।
दूर से ही सबको एक साथ आते जंगल के राजा शेर ने देख लिया । शेर ने उन सब को रोका औऱ दहाड़ मारकर बोला.....
" अबे बेवकूफों, कहाँ जा रहे हो तुमसब इस शैतान खरगोश के पीछे पीछे....साला इसको कोई काम नहीं है... सुबह सुबह ख़ुद गांजा पीकर सबको भाषण देता फिरता है औऱ फ़ालतू में अपने साथ पूरा जंगल घुमाता है.... कई बार तो इसने मुझें भी बेवकूफ बनाया है......"
शेर के इतना कहते ही खरगोश भागकर झाड़ियों में छुप गया औऱ सभी एक दूसरे का मुंह ताकने लगे ।
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#निष्कर्ष...... ज्ञान सिर्फ़ दूसरों को देने के लिए होता है, उसपर ख़ुद अमल नहीं किया जाता शायद......!!
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