खुले बाल की सज़ा
कुंदन पुर नामक एक गांव में एक बच्ची रहती थी टीना कहती है मां मेरे बाल को बना दो ना ,देख नहीं रही बर्तन साफ कर रही हूं मां ने मना करते हुए कहा टीना बोली पर मुझे अपनी सहेलियों के साथ मंदिर जाना है ना, बेटा अगर ऐसा है तो जैसा भी हो बाल बना कर जा कौनसा तू फोटो खींचा ने जा रही है टीना की मां ने टोकते हुए कहा ओह मां कृपया कर दीजिए ना, मां ने कहा नहीं बेटा मेरे पास अभी समय नहीं है। टीना बिना बाल बनाए खुले केस उदास होकर सहेलियों के साथ मंदिर जाने के लिए निकल जाती है। टीना जब इमली पेड़ के पास से गुजरती है तभी वह टीना अचानक गायब हो जाती है उसकी सहेलियां थोड़ी आगे रहती है इसलिए उन्हें पता नहीं चलता मगर जब टीना से मुखातिब होने के लिए मुड़ते हैं तब टीना गायब मिलती है वे आश्चर्य में पड़ जाते हैं अचानक टीना कहां खो गई कहां चली गई कहीं वापस घर तो नहीं चली गई होगी, वे परेशान हो जाते हैं तो वे आवाज लगाते हैं परन्तु टीना की आवाज ना मिलने पर वे मंदिर की ओर आगे बढ़ जाते हैं जब उसकी सहेलियां मंदिर से पूजा कर वापस उसी रास्ते से लौटते हैं तो देखते हैं कि टीना की पूजा की थाली और उसके सामान पेड़ पर लटके हुए हैं सोच में पड़ जाते हैं कि थाली पेड़ पर लटकी है |यह कैसे हो सकता है लगता है टीना हमारे साथ मजाक कर रही है तभी उनमें से एक कहती है नहीं ऐसा नहीं हो सकता हमें डराने के लिए इतना भद्दा मजाक नहीं कर सकती,तुम इतने यकीन से कैसे कह सकती हो झिलमिल, मीना ने पूछा ।मैं ऐसे ही नहीं कह रही हूं तुम लोग जानती हो कि टीना मंदिर जाने को कभी नहीं कतराती तो वो आखिर मंदिर क्यों नहीं गई वह कभी नागा भी नहीं करती वे सब सोचते रहे ।मंदिर जाने को और पेड़ पर पूजा की थाली को लटकाने की बात है तो वह इसका अपमान कभी नहीं करती ऐसा मजाक कैसे कर सकती है। तू ही बता जीवाली क्या उसे कोई भूत उठाकर ले गया ।मुझे नहीं पता झिलमिल फिर वे थाली को उतार टीना के घर जाते हैं वे उसे टीना टीना की आवाज़ लगाते है तो उसकी मां पूछती है कि वो तुम्हारे साथ ही मंदिर गई थी ना । फिर कहां गई वो, हमारे साथ ही थी पर बीच में गायब हो गई। मां ने आश्चर्य से पूछ मतलब। मतलब यह काकी कि टिना हमसे थोड़ी पीछे हो गई थी और हम थोड़े आगे हो गए थे पीछे मुड़कर देखा तो वह वहां पर थी नहीं तो हमने सोचा कि वह घर चली गई होगी।हमने उसे बहुत ढूंढा भी पर वह वहां पर नहीं थी और जब हम मंदिर से लौट रहे थे तब टीना की थाली और पूजा के सामान लटके थे। हम बहुत डर गए ।
मा ने कहा ठीक है मुझे लगता है कि वह मुझसे नाराज है क्योंकि आज सुबह उसने मुझे बहुत जिद की उसके बाल सवारने को पर मैं काम कर रही थी इसलिए मैंने नहीं किया और वह उदास हो कर चली गई।झिलमिल बोली हां वह खुले बाल ही तो गई थी शायद इसीलिए नाराज हो सकती है । हां ठीक है तुम लोग जाओ मैं देखती हूं। जब बहुत समय बीत जाता है और टीना का कुछ पता नहीं चलता है तब उसकी मां बहुत घबरा जाती है और टीना के पिता और अपने पड़ोसियों को यह घटना वह बताने लगती है ।यह बात धीरे-धीरे आग की तरह पूरे गांव में फैल जाती है ।सब लोग टीना को बहुत ढूंढने लगते पर टीना का कोई अता - पता नहीं रहता है।
2 दिन हो जाता है टीना की मां की हालत खराब हो जाती है ,लोग सोच में पड़ जाते है कि टीना गई तो गई कहां ।अभी टीना की मां को शक होता है, बिना कुछ बताए किसी को सीधा उस इमली के वृक्ष के पास मीना को ढूंढने लगती है , पेड़ को हिला - हिला कर भी देखती है पर टीना नहीं रहती है ।वह तांत्रिक को बुला कर लाती है और वहीं पर हवन शुरू हो जाता है। तुम्हें क्या लगता है तांत्रिक, तुम मुझे कैद कर लोगे।तो यह तुम्हारी भूल है तुम मुझे नहीं, मैं तुम्हें कैद कर लुंगी। तुम में इतनी शक्ति नहीं है। पेड़ से एक भयानक राक्षसी निकलती है, दांत नीला हरा और खुले हुए बड़े बड़े बाल होते हैं। तांत्रिक कहता है- चिल्ला कर क्या, तूने इसकी बेटी को कैद किया है।हा, मैंने ही किया है इसकी बेटी को कैद ।- राक्षसी। क्यो, तांत्रिक ।क्योंकि इसकी बेटी के पास बहुत बड़े-बड़े बाल थे और खुले हुए मुझे उसके बाल बहुत पसंद आए मुझे बाल अति प्रिय है इसलिए मैंने इसकी बेटी को कैद किया है। मेरी बेटी का बाल चाहिए मेरी बेटी का बालों मैं क्या करूंगा टीना की मां कहती है मेरी बेटी वापस कर दो कि मां कहती है मैं ऐसा कैसे कर सकती हूं मैं उसे अपनी दासी बना कर रखूंगी और उसके बाद मैं खुद ले लूंगी मेरे पास तो पहले से ही बहुत बड़े बड़े बाल हैं तो तुम इतने बालों का क्या करोगी लेकिन बार मेरे हैं और सब बाल मेरे हैं तांत्रिक कहता है कि अब मैं तुझे नहीं छोडूंगा अब मैं तुझे याद करूंगा तभी टीना की मां ने तांत्रिक को रोते हुए कहता है कहती है नहीं नहीं मेरे पास एक उपाय है तुम इसे जाने दो फिर मैं इसे मैं कैद करूंगी अपनी बेटी को मैं बताऊंगी उस समय तांत्रिक उस राक्षसी को वहां से जाने देता है |
फिर अगले दिन टीना की मां अपने मां के यहां जाती है और उससे इस सारी बात बताती है इसका हल बताने को कहती है तो वह कहती है कि जंगल पर एक अच्छे जादूगरनी रहती है जो उसे इस परेशानी से निकाल सकती है और उस राक्षसी के अंत का उपाय बता सकती है वह वह तुरंत ही इस जंगल के लिए निकल जाती है उस जादूगरनी के पास जाने के लिए वह बहुत ढूंढने पर उसे वह जादूगरनी का झोपड़ा दिखाई देता है वह वहां जाकर उसे सारी घटना बता देती है तब वह उसे बता देती है दूसरे दिन टीना की मां अपने बाल को खुला कर वह उसी इमली के वृक्ष के नीचे गोल-गोल घूमने लगती है उसे वह राक्षसी देख उससे भी टीना की तरह अपने ऊपर खींच लेती है और कहती है पहले तो मेरे पास उसकी बेटी आई थी अब तो उसकी मां भी आ गई अब तो दोनों भी ही मेरी दास या बनेंगे और दोनों के बाल मेरे होंगे ठीक है तुम हम दोनों के बाल ले लेना और हमें दासिया भी बना लेना और तुम जो चाहे हमारे साथ कर लेना हमें कोई भी दिक्कत नहीं होगी मुझे तो खुशी होगी कि मैं और मेरी बेटी हम दोनों तुम्हारी दासिया है क्या कर रही है माटी ना चुप रहो अभी मैं संभाल रही हूं ना सब कुछ ठीक है राक्षस सीजी राक्षसी नहीं रानी कहो मुझे जी सीजी हमें अपनी दासिया बना सकते हैं और हमारे बाल भी ले सकते हैं हमें खुशी होगी मैं तो सा भाग्यशाली हूं कि मैं अब मुझे आपकी दासी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है यह बात तो है राक्षसी कहती है तू दासी होने के नाते बताइए |
राक्षसी रानी जी मैं आपके लिए कौन सा भोजन तैयार करो मुझे बहुत सारे भोजन बनाने आते हैं तो आप ही बताइए आपको क्या खाना है हां मुझे मछली खाने का मन हो रहा है हां ठीक है मैं बहुत अच्छे से बना लेती हूं वर्ली से कुछ मछलियां निकाल कर उसे बनाने लगती है और भोजन पर उसे दे देती है यह खाना देखने में ही प्रतीत होता है तो क्या मैं शुरू करो हम आपको क्या-क्या दे रानी जी आप आप अपने से ही खुद खा लीजिए आप अपने को ही आज्ञा दे दीजिए ठीक है मैं खाना सकती हूं तो बहुत है पीना अपनी मां से अजीब करें दासी बनी आई है इसकी उससे अच्छा तो आती ही नहीं मैं आपकी यह दुर्दशा नहीं देख सकती नहीं मैं तुम्हें बचा नहीं आई हूं और इस रक्ष खाने की आई हूं यह तो क्या खुसर पुसर कह रही हो वह कहती है नहीं बोल रही है कि मैं तो आप की खातिर दारी क्यों कर रही हूं मैं क्योंकि हमें तो सौभाग्य प्राप्त हुआ है आ रही थी अभी से भी जल्दी से समझा लो इसे मैं आप लोगों की भलाई है ऐसा रक्षसी उसे खाने लगती है बिना कुछ सोच विचार अपने इतने बड़े दुश्मन के हाथों से खाना खाना उसके लिए दुर्भाग्य था क्योंकि वह खाने में अगर कुछ भी उस पोटली से थी ना कि मां कोई भी खाने को दे देती तो उसमें उस अच्छे जादूगरनी के दिए हुए विश का ही असर रहता इसलिए वह राक्षसी वहीं पर नष्ट हो गई और उस राक्षसी के जो चढ़ी थी उसको टीना की मां ने तोड़ दिया जिससे उसकी सारी की सारी शक्ति नष्ट हो गई और टीना और उसकी मां इमली के पेड़ के नीचे जमीन पर आ पहुंचे और उस राक्षसी का अंत हो गया |
सीख – लडकियों को बाल धोने के पश्चात जब भी कही बाहर निकलना हो तो बाल बांधकर या संवार कर निकले यह सबक शास्त्र सम्मत है |
Tags -
#story #storytelling #storyofmylife #storyteller #storytime #storyofthestreet #storyboard #Storybook #Storytellers #storyportrait #storyboarding #storypromoter #storyboards #storyline #storyoftheday #storys #storybridge #Storyclub #storyart #storyofindia #moralstories #interestingstories #eductionalstories #hindistories #ज्ञानवर्धककहानियां
#नैतिककहानियाँ #शिक्षाप्रदकहानियां #प्रेरककथा # बोधात्मककहानियां
#हिंदीकहानियां #मनोरंजककहानियां #लोककहानियां #folkstories #dharmik kahaniyan #kidsstories
0 Comments
Post a Comment