अंतर        

   यह उन दिनों की बात है जब हम एक दफ्तर में काम करने  के लिए रोज सफर किया करते थे तो हमें आने जाने   के लिए  एक निजी वाहन  चालक जो प्रतिदिन हमारे गांव से शहर के लिए निकलता था हम भी उस में हमेशा की तरह ही अपना टिफिन लेकर निकल पड़ते थे lमैं अक्सर ड्राइवर को देखा करता था कि वह रास्ते में जिस भी एक का इशारा मिला अपना हाथ बताया तो वह अपनी गाड़ी रोक देता था बैठा लेता था या यूं कहें कि उसेअन्य सवारी को थोड़ा सा खिस काते हुए वह उनके लिए बैठने की जगह बना देता था और इस तरह पूरा खचाखच भरी हुई गाड़ी लेकर शहर की ओर जाता था और सवारी खाली करने के पश्चात उधर से पुनः सभी सवारियों को भी वापस गांव छोड़ देता था इस प्रकार से वहां एक दिन में गांव की दो बार चक्कर लगाया करता था और मेरे ऑफिस से छूटने के समय भी मुझे वही मिल जाता था और मैं उसी गाड़ी में बैठकर रोज आया जाया करता था इस से हम दोनों एक दूसरे से परिचित भी हो गए थे क्योंकि केवल छुट्टी को छोड़कर बाकी सभी दिन ऑफिस जाया करता था और मैं ज्यादातर अपने ऑफिस ड्यूटी से नागा भी नहीं किया करता था समय गुजरता गया और वह 5 साल न जाने कैसे बीत गया पता ही नहीं चला परन्तु कुछ दिनों बाद मेरी किसी अन्य शहर में पोस्टिंगकर दी गई एक दिन मुझे उसी एक गाड़ी में सफर करना पड़ा हालांकि अब मेरे पास कार था और ज्यादातर मैं अपने कार का इस्तेमाल किया करता था लेकिन उस दिन न जाने क्यों मुझे अपने वाहन को छोड़कर पुरानी याद ताजा करने के लिए टैक्सी में जाने के लिए निकला उधर से एक राज्य परिवहन बस आ रही थी मैंने उससे हाथ देकर रुकवा या और उसमें बैठ गया उस में ज्यादा भीड़ नहीं थी तो मैं ड्राइवर के बाजू वाली सवारी सीट पर बैठ गया तो क्या देखता हूं कि वही व्यक्ति जिसके गाड़ी में आया जाया करता था वह व्यक्ति ड्राइविंग कर रहा है अब जबकि मेरी पुरानी जान-पहचान थी तो मैंने उससे बातचीत करते हुए उससे पूछा कि अरे आपका पुराना जो टेंपो था जिसे आप चलाया करते थे उसका क्या हुआ तब उन्होंने बताया कि भैया दो साल पहले ही मैंने अपना वो टैंपो बेच कर सरकारी ड्राइवर बन गया हूं और अब इसी से ही गुजारा हो रहा है इस तरीके से हम लोग एक दूसरे से काफी पुरानी यादें ताजा किए|      
                                    फिर कुछ दूर चलने के पश्चात मैंने देखा कि एक स्टापेज पर कुछ लोग खड़े थे उन्होंने गाड़ी रुकने का इशारा किया तो उसने बकायदा गाड़ी रोकी सवारी को भी बिठाया पर यह क्या कुछ ही मीटर चलने के पश्चात फिर एक सवारी ने हाथ दिखाया ड्राइवर का मुंह देखने लायक था उन्होंने बिना गाड़ी रोके गाड़ी आगे बढ़ा दी उस सवारी को नहीं बिठाया तो मैंने उससे पूछा कि अरे उस सवारी को क्यों नहीं बिठाया  बेचारा हो सकता है बहुत इमरजेंसी में हो आपको उसे बैठना चाहिए था तो उसने जो जवाब दिया उस सुनकर मैं हैरान रह गया उसने कहा कि उसके बाप के नौकर हैं कि जहां चाहे वहां हाथ दिखाएं और हम गाड़ी रोक दें मुझे उन दिनों की बात ताजा कर दी अपने खुद का गाड़ी चलाया करता था तब हर पल कुछ ही दूरी पर चाहे क्यों ना हो कोई भी सवारी जब हाथ देता था तो बका यदा  उसको बैठाया करता था और  जब मैं मना करता कि भाई लेट हो जाएगा फिर इतना सवारी मत बैठा  जगह भी नहीं बची है तब वह कहा करता था कि भैया देखो यदि हम सवारी नहीं बैठाएंगे तो खाएंगे क्या और आज ये देख कर मैं समझ गया की  उस मेंऔर इसमें कितनी जमीन आसमान का अंतर है जब वह खुद का अपना गाड़ी चलाता था तब एक एक सवारी उसके लिए कितना महत्वपूर्ण था और आज जब वह सरकारी ड्राइवर बन गया है तब उसे कुछ भी अपनी चिंता नहीं है क्योंकि उसे पता है कि मुझे महीने में जो मेरी फिक्स ड सैलरी है वह तो मिलेगा ही तो क्यों मगजमारी करे तो इस प्रकार से यह जो सरकारी और प्राइवेट काम में  सोच का अंतर यह अपने आप में  सोचने पर मजबूर कर देता है कि एक आदमी जब प्राइवेट जॉब करता है तब उसकी फिलिंग्स क्या होती है और जब वह सरकारी नौकरी करने लग जाता है तब उसकी फिलिंग्स में कितना बदलाव आ जाता है
            कहानी पढ़कर समझ में आ ही गया होगा कि क्यों हर व्यक्ति सरकारी नौकरी के पीछे भागता है।
Tags - 

#story #storytelling #storyofmylife #storyteller #storytime #storyofthestreet #storyboard  #Storybook #Storytellers  #storyportrait  #storyboarding  #storypromoter  #storyboards #storyline  #storyoftheday #storys #storybridge    #Storyclub #storyart #storyofindia #moralstories #interestingstories #eductionalstories #hindistories #ज्ञानवर्धककहानियां 
#नैतिककहानियाँ #शिक्षाप्रदकहानियां  #प्रेरककथा # बोधात्मककहानियां 

#हिंदीकहानियां #मनोरंजककहानियां #लोककहानियां #folkstories #dharmik kahaniyan #kidsstories   
            
Our Other Popular Stories -